Tutorial : कंप्यूटर फंडामेंटल्स

कंप्यूटर शब्द लैटिन भाषा के कंप्यूट शब्द से लिया गया है जिसका अर्थ है, गणना करना |  अतः इसे संगणक कहा जाता है| यह एक गणना यंत्र है, जो गणितीय क्रियाओं को तीव्र गति से संपन्न करता है|  कंप्यूटर के विकास की अवधि काफी लंबी है| समय और आवश्यकतानुसार कंप्यूटर का विकास होता गया| आज के समय में कंप्यूटर एक आवश्यक और महत्वपूर्ण मशीन है |

 

1. परिभाषा (Definition)

कल इलेक्ट्रॉनिक स्वचालित मशीन है,  जो यूजर से डाटा या सूचनाओं को इनपुट के रूप में प्राप्त करता है,  मेमोरी में स्टोर करता है और उन्हें निर्देशों के अनुसार प्रोसेस करके आउटपुट के रूप में परिणाम प्रदान करता है | कंप्यूटर में निम्नलिखित  क्षमताये होती है |

 

  1. यूजर द्वारा दिए गए डेटा को ग्रहण करना

  2. यूजर द्वारा दिए गए डेटा को क्रियान्वित करना

  3. यूजर की  आवश्यकता अनुसार परिणाम दिखाना |

 

कंप्यूटर में डेटा ग्रहण करने तथा प्रोग्राम व निर्देशों के अनुसार क्रियांवित करने की क्षमता होती है | वह डेटा पर तार्किक एवं गणितीय  क्रियाएं करने में सक्षम है | कंप्यूटर में डेटा इंटर करने के लिए इनपुट यंत्र होते हैं | डाटा को प्रोसेस करने के लिए जो यंत्र काम में लिया जाता है,  उसे CPU (Central Processing Unit) कहते हैं | CPU कंप्यूटर के मस्तिष्क के रूप में कार्य करता है| परिणाम को प्रदर्शित करने के लिए आउटपुट यंत्रों का प्रयोग किया जाता है |

 

2. कंप्यूटर का इतिहास (History Of Computer)

कंप्यूटर का इतिहास बहुत ज्यादा पुराना है|  चीन में एक गणना यंत्र अबेकस का आविष्कार किया गया था |  यह एक यांत्रिक डिवाइस है | इसमें एक लकड़ी की फ्रेम के अंदर कई समानांतर तार  लगी होती हैं | जिम में 5 या इससे अधिक बीड (मोती) होते हैं | प्रारंभ में व्यापारी इस यंत्र का प्रयोग गणना करने के लिए किया करते थे |

 

फ्रांस के महान गणितज्ञ ब्लेज पास्कल ने 1642 में विश्व का पहला यांत्रिक  अंकिय गणना यंत्र विकसित किया था | इस मशीन को एडिंग मशीन भी कहा जाता था | ब्लेज पास्कल कि इस मशीन को पास्कलाइन भी कहा जाता है  और यह पहला मैकेनिकल केलकुलेटर था |

 

बैबेज का कंप्यूटर के विकास में बहुत बड़ा योगदान रहा है |  एनालिटिकल इंजन पहला प्रोग्रामिंग कंप्यूटर था | यह पहला कंप्यूटर था जो निर्देशों के आधार पर गणना किया करता था |  इसी कारण चार्ल्स बैबेज को कंप्यूटर का जनक (Father Of Computer) कहा जाता है |

 

IBN के चार इंजीनियर सहित आईकैन ने 1939 में एक  मशीन विकसित की जिसका नाम Automatic Sequence Controlled Calculator रखा गया बाद में इस मशीन का नाम मार्क - 1 रखा गया यह पहला विद्युत यांत्रिक कंप्यूटर था |

 

सन 1946  में 18 तथा में एकर्ट तथा मैकली नामक वैज्ञानिकों ने एनीएक नामक कंप्यूटर बनाया | यह विश्व का पहला सामान्य उद्देश्य के लिए बनाया गया विद्युतीय कंप्यूटर था |

 

UNIVAC  को सन 1951 में विकसित किया गया था | यह प्रथम डिजिटल कंप्यूटर था इसका उपयोग व्यापारिक कार्यों के लिए होता था  | यह की एन आई ए सी (ENIAC)) का ही विकसित रूप था |


3. कंप्यूटर की पीढ़ियां (Computer Generations)

कंप्यूटर के इतिहास को हम एक समय अंतराल में विकसित की गई नई तकनीक के आधार पर पांच पीढ़ियों में समझ सकते हैं | प्रत्येक पीढ़ी में कंप्यूटर के मूलभूत सिद्धांत व उसके किसी भाग में नई तकनीक के विकसित होने पर एक नई पीढ़ी की शुरुआत होती है | गणना के लिए बने पहले उपकरण से लेकर आधुनिक कंप्यूटर के आविष्कारक का वर्णन इस प्रकार है |
 

Generation

Period

Particulars

First

1946-1955

इनमें आंतरिक कार्य के लिए वैक्यूम ट्यूब या  वाल्व का उपयोग किया जाता था |

Second

1956-1965

इन कंप्यूटर में वैक्यूम ट्यूब के स्थान पर ट्रांजिस्टर का उपयोग किया जाता था |

Third

1966-1970

इन कंप्यूटर में ट्रांजिस्टर के स्थान पर इंटीग्रेटेड चिप का उपयोग किया गया

Fourth

1971-1985

इसमें VLSIC का प्रयोग किया जाने लगा

Fifth

1985….

इन कंप्यूटर में माइक्रोप्रोसेसर का प्रयोग आंतरिक कार्य के लिए किया जाने लगा |


 

4. कंप्यूटर की विशेषताएं (Characterstics of Computer)

  • कार्य करने की गति  :  कंप्यूटर के कार्य करने की गति बहुत तेज होती है | जिस कार्य को एक व्यक्ति कई घंटों महीनों तथा वर्षों में पूरा करता है | उसे कंप्यूटर कुछ क्षणों में पूरा कर सकता है कंप्यूटर के कार्य करने की गति को माइक्रो सेकंड,  नैनो सेकेंड में मापा जाता है |

 

  • उच्च भंडारण क्षमता :  किसी भी डाटा को किसी भी रुप व मात्रा में कंप्यूटर में  स्टोर करके रख सकते हैं | कंप्यूटर की भंडारण क्षमता काफी अधिक होती है | इसमें डाटा को लंबे समय तक स्टोर करके रखा जा सकता है और आवश्यकतानुसार पुनः प्राप्त किया जा सकता है |

 

  • स्वचालित :  कंप्यूटर एक स्वचालित मशीन है जो यूजर द्वारा किए गए निर्देशों को बिना किसी मानवीय बाधा के संपन्न कर सकता है  |

 

  • शुद्धता : यदि कंप्यूटर में इनपुट किए गए डेटा पूर्ण रूप से सही है तो कंप्यूटर शत प्रतिशत सही परिणाम देने कि क्षमता रखता है इसलिए कंप्यूटर की गणना करने में  गलती की संभावना 0 के बराबर होती है |

 

  • विविधता : कंप्यूटर का प्रयोग विभिन्न कार्यों के लिए किया जाता है | इसका प्रयोग किसी भी प्रकार के दस्तावेज तैयार करने, प्रिंट करने, मनोरंजन आदि उद्देश्य के लिए किया जा सकता है

 

  • इंटीग्रिटी और पुनरावृति  क्षमता : कंप्यूटर कार्य को  ईमानदारी के साथ पूर्ण रुप से संपन्न करता है|  इसमें कार्य को दोहराने की क्षमता होती है |


5. कंप्यूटर के उपयोग (Applications Of Computer)

आज कंप्यूटर मानव जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है हम अपने दैनिक जीवन में देखते हैं कि प्रत्येक क्षेत्र में कंप्यूटर का उपयोग किया जा रहा है जैसे डेस्कटॉप पब्लिशिंग, चिकित्सा विज्ञान, यातायात प्रशासन, व्यवसाय तथा  ई-कॉमर्स, शिक्षा, मनोरंजन, नेट बैंकिंग आदि |


6. कंप्यूटर के प्रकार (Classification Of Computer)

कार्य प्रणाली के आधार पर कंप्यूटर का वर्गीकरण निम्न प्रकार है |

  1. डिजिटल कंप्यूटर

  2. एनालॉग कंप्यूटर

  3. हाइब्रिड कंप्यूटर

आकार के आधार पर डिजिटल कंप्यूटर का वर्गीकरण निम्न प्रकार है

  1. माइक्रो कंप्यूटर

  2. मेनफ्रेम कंप्यूटर

  3. मिनी कंप्यूटर

  4. सुपर कंप्यूटर


6.1.  डिजिटल कंप्यूटर (Digital Computer)

डिजिटल कंप्यूटर सभी डाटा को डिजिटल में प्रदर्शित करते हैं एवं सभी कार्य इन  डिजिट्स (केवल 0 और 1 ) के आधार पर ही कर सकते हैं| गणनाओं से संबंधित सभी कार्य संख्याओं को जोड़कर करते हैं|  यह कंप्यूटर आकार के आधार पर चार प्रकार के होते हैं जिनका वर्णन निम्न प्रकार है |

  • Micro Computer : सन 1971 में इंटेल कॉरपोरेशन द्वारा सर्वप्रथम माइक्रोप्रोसेसर चिप का विकास किया गया है ED Roberts द्वारा प्रथम माइक्रो कंप्यूटर का विकास किया गया|  अभी सभी कंप्यूटर जो माइक्रो प्रोसेसर का मुख्य अवयव के रूप में प्रयुक्त करते हैं, माइक्रो कंप्यूटर कहलाते हैं| पर्सनल कंप्यूटर, नोटबुक, लैपटॉप, टैबलेट, पीसी, Handheld( पीडीए &  स्मार्टफोन) माइक्रो कंप्यूटर के प्रमुख उदाहरण है |

 

  • Mini Computer : मिनी कंप्यूटर को मिड रेंज कंप्यूटर के नाम से भी जाना जाता है| मिनी कंप्यूटर माइक्रो कंप्यूटर की तुलना में अधिक शक्तिशाली होते हैं| इनकी प्रोसेस क्षमता माइक्रो कंप्यूटर की तुलना में 5 गुना अधिक होती है | सामान्यता टाइम शेयरिंग तथा डिस्ट्रीब्यूट डाटा प्रोसेसिंग में प्रयोग किया जाता है |  यह आकार में माइक्रो कंप्यूटर से बड़े तथा मेनफ्रेम से छोटे होते हैं |

 

  • Main Frame Computer :  मेनफ्रेम कंप्यूटर की प्रोसेसिंग क्षमता मिनी कंप्यूटर से अधिक होती है | इनका प्रयोग कंप्यूटर नेटवर्क में सरवर के रूप में किया जाता है | मेनफ्रेम कंप्यूटर आकार में बड़े होते हैं और मल्टी यूजर वातावरण के लिए बनाए गए है | अतः इनकी भंडारण  क्षमता तथा प्रोसेसिंग क्षमता अधिक होती है| इनका प्रयोग मुख्यत वैज्ञानिक प्रयोग प्रयोगों तथा जटिल गणना करने के लिए किया जाता है |

 

  • Super Computer : सुपर कंप्यूटर की प्रोसेसिंग क्षमता मेनफ्रेम कंप्यूटर से अधिक होती है | इसका प्रयोग  नई तथा जटिल गणनाएं करने में किया जाता है | इनमें मल्टीप्रोसेसिंग क्षमता होती है | यह सबसे पावरफुल कंप्यूटर हैं | इनकी कीमत अधिक होती है अतः इसका प्रयोग विशेष कार्यों के लिए किया जाता है भारत निर्मित परम और IBM का BlueZene सुपर कंप्यूटर का उदाहरण है|

 

6.2. एनालॉग कंप्यूटर (Analog Computer)

एनालॉग कंप्यूटर एक विशेष प्रकार के कंप्यूटर होते हैं |  इनका प्रयोग का ताप, दबाव, गति, ध्वनियां, विद्युत प्रवाह जैसे विशेष संकेतों का कार्य करने के लिए किया जाता है|  ये तापमान, दबाव, गति, विद्युत प्रभाव विशेष संकेतों के आधार पर कार्य करते हैं | प्रत्येक कार्य के लिए इसे अलग डाटा की आवश्यकता होती है |

 

6.3.  हाइब्रिड कंप्यूटर (Hybrid Computer)

इन कंप्यूटर में डिजिटल  तथा एनालॉग कंप्यूटर के संयुक्त कार्य पद्धति का प्रयोग किया गया है|  अतः यह कंप्यूटर ताप, दाब, विद्युत प्रवाह के संकेतों पर कार्य करते हैं, यह संख्याओं के आधार पर भी कार्य करते हैं|


7. कंप्यूटर संरचना (Computer Architecture)

कंप्यूटर की आंतरिक संरचना में प्रयोग किए जाने वाले उपकरणों को कार्य के आधार पर 4 इकाइयों (Units) में विभाजित किया जा सकता है

  • इनपुट इकाई (Input Unit):

इनपुट यूनिट में  वह सभी उपकरण आते हैं जिनका प्रयोग प्रयोग कंप्यूटर सिस्टम में डेटा इनपुट करने तथा निर्देश देने के लिए किया जाता है | सामान्यतः इनपुट के लिए प्रयोग किए जाने वाले मुख्य उपकरण कीबोर्ड, माउस, स्कैनर, लाइट, पेन एवं ऑप्टिकल मार्क रीडर आदि हैं |

 

  • आउटपुट इकाई (Output Unit)

आउटपुट इकाई में वे सभी उपकरण आते हैं जिनका प्रयोग प्रोसेसिंग के बाद सूचना निर्देशों तथा परिणामों को स्थाई या अस्थाई रूप से प्राप्त करने के लिए किया जाता है मॉनिटर प्रिंटर स्पीकर आदित्य आउटपुट उपकरण है

 

  • स्टोरेज इकाई (Storage Unit)

मेमोरी यूनिट कंप्यूटर सिस्टम की इकाई है, को स्थाई जो इनपुट यूनिट द्वारा इनपुट किए गए डेटा को स्थाई या अस्थाई रूप से स्टोर करके रखती है|  इन्हें प्राइमरी या मुख्य मेमोरी के नाम से भी जाना जाता है| रैम-रोम आदि प्राइमरी मेमोरी है | रैम एक अस्थाई मेमोरी है, जबकि रोम एक स्थाई मेमोरी है|

 

  • प्रोसेसिंग यूनिट (Processing Unit)

कंप्यूटर सिस्टम में क्रिया से संबंधित सभी कार्य प्रोसेसिंग यूनिट द्वारा किए जाते हैं|  इसे सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट CPU कहा जाता है| CPU कहीं कंपोनेंट से मिलकर बना होता है इसके दो मुख्य अंग होते हैं|  एक अर्थमेटिक एंड लॉजिकल यूनिट (ALU) और दूसरा कंट्रोल यूनिट (CU)


 

8. इलेक्ट्रिकल डाटा (Electronical Data)

जैसा कि हम जानते हैं,  कंप्यूटर मानवीय भाषा में कार्य नहीं करता है|  यह मैं तो मानवीय भाषा के डाटा रीड कर सकता है, और न ही मानवीय भाषा में गणनाएं कर सकता है|  कंप्यूटर डाटा पर गणनाएं करने, सूचना स्टोर करने तथा आउटपुट संबंधित सभी कार्य एक विशेष कैरेक्टर कोड फॉर्म में करता है | इसी कारण से कंप्यूटर में इनपुट और आउटपुट इंटरफ़ेस की आवश्यकता होती है नंबर सिस्टम दो प्रकार का होता है|

 

  • Non Positional Number : नॉन पोजिशनल नंबर वे होते हैं जिन पर गणितीय गणना नहीं की जा सकती| जैसे - One, Two, I, II, a,b  इत्यादि

  • Positional Number :पोजीशनल नंबर वे  होते हैं जिन पर गणितीय क्रियाओं आसानी से की जा सकती है|  पोजीशनल नंबर सिस्टम 4( डेसीमल नंबर सिस्टम, बाइनरी नंबर सिस्टम, ऑक्टल नंबर सिस्टम, और हेक्साडेसीमल नंबर सिस्टम)  प्रकार का होता है|

 

गणना से संबंधित कार्य करने के लिए डेसीमल नंबर सिस्टम का प्रयोग करते हैं|  इसका बेस 10 होता है अतार्थ इसमें 10 संख्याएं (0-9) होती है| कंप्यूटर सिस्टम प्रत्येक कार्य को करने के लिए  बाइनरी नंबर सिस्टम का प्रयोग करता है| इसका आधार 2 होता है| इसलिए इसमें केवल दो ही संख्याएं (0-9) होती हैं | इन्हें बिट कहा जाता है|

 

8.1. बाइनरी नंबर सिस्टम (Binary Number Syatem)

कंप्यूटर सिस्टम प्रत्येक कार्य को करने के लिए बाइनरी नंबर सिस्टम का प्रयोग करता है|  इसका आधार दो होता है| इसलिए इसमें केवल दो ही संख्याएं (0,1) होती हैं| इन्हें बिट (बाइनरी डिजिट) कहा जाता है| एक बाइनरी नंबर का डेसीबल में कन्वर्शन  निम्न प्रकार है|

 

उदाहरण :

(01101101)2……………………….(?)10

01101101

(02)7+(12)6+(12)5+(02)4+(12)3+(12)2+(02)1+(12)0

64+32+8+4+1

=109


 

8.2. डेसीबल नंबर सिस्टम (Decimal Number Syatem)

गणना से संबंधित कार्य करने के लिए डेसीमल नंबर सिस्टम का प्रयोग करते हैं|  इसका 10 होता है| अतार्थ इसमें 10 संख्याएं(0-9) होती हैं| एक डेसीमल नंबर  का बायनरी नंबर में कन्वर्शन निम्न प्रकार है |

 

(140)10……………………..(?)2

संख्या         भागफल     शेषफल

140/2         70        0

70/2           35        0

35/2           17        1

17/2            8        1

8/2             4        0

4/2             2        0

2/2             1        0

½                0        1

 

अतः डेसीमल नंबर (140) का बायनरी नंबर में (10001100) होगा |


9.  बायनरी कोडिंग स्कीम (Binary Coading Schema)

बायनरी कॉलिंग स्कीम में प्रत्येक कलेक्टर को बिट्स का एक अलग  क्रम प्रदान करती हैं| इसके लिए दो कोड (ASCII और EBCDIC) का उपयोग किया जाता है| हाल ही में विकसित  यूनिकोड में 16 बिट्स का प्रयोग किया जाता है|

कंप्यूटर में डाटा निरूपित करने के लिए ASCII कोड  प्रणाली का सर्वाधिक प्रयोग किया जाता है | इसका पूरा नाम American Standard Code for Information Interchange है|  इसे बिट्स भी कहा जाता है|

 

EBCDIC का पूरा नाम Extended Binary Coded Decimal Interchange Code  है| यह एक पुराना कोड है जो मूल रूप से IBM द्वारा विकसित किया था | यूनिकोड 16 बिट कोड का होता है जो ASCII और EBCDIC दोनों का सहायक है | इसका प्रयोग अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं के लिए भी होता है |

 

यूनिकोड विभिन्न प्रकार की भाषा लिपियों को कंप्यूटर कोड में बदलने की एक character encoding standard प्रणाली  है | कंप्यूटर मूल रूप से नंबरों से संबंध रखते हैं | यह प्रत्येक ये अक्षर और वर्ण के लिए एक नंबर निर्धारित करके उसे कंप्यूटर में स्टोर करते हैं |

 

10. पर्सनल कंप्यूटर (Personal Computer)

किसी व्यक्ति विशेष के द्वारा प्रयोग में लिए जाने वाले कंप्यूटर को पर्सनल कंप्यूटर (माइक्रो कंप्यूटर) कहा जाता है | पर्सनल कंप्यूटर कई प्रकार के होते हैं | एक पर्सनल कंप्यूटर डेस्कटॉप, लैपटॉप, टैबलेट आदि के रूप में हो सकता है |

पर्सनल कंप्यूटर मुख्यतः की बोर्ड या माउस द्वारा ही डाटा प्राप्त करते हैं और उन्हें सेव करने के लिए हार्ड डिस्क का प्रयोग किया जाता है|  किसी भी प्रकार के डाटा को प्रोसेस करने का कार्य माइक्रोप्रोसेसर द्वारा किया जाता है | डेटा को सॉफ्ट कॉपी आउटपुट के रूप में प्रदर्शित करने के लिए मॉनिटर का और डेटा को हार्ड कॉपी में प्रस्तुत करने के लिए प्रिंटर का प्रयोग किया जाता है| पर्सनल कंप्यूटर के मुख्य कंपोनेंट का वर्णन निम्न प्रकार है |

 

  • System Unit : सिस्टम यूनिट को सिस्टम कैसिस भी  कहा जाता है | यह एक कंटेनर जैसा होता है  जिसमें इलेक्ट्रॉनिक तत्व होते हैं | किसी भी कंप्यूटर सिस्टम का निर्माण  सिस्टम कैसिस द्वारा ही किया जाता है | सिस्टम यूनिट अलग-अलग कंप्यूटर के लिए अलग प्रकार के होते हैं |

  • System Board : सिस्टम बोर्ड को मदरबोर्ड भी कहते हैं |  यह कंप्यूटर का सबसे महत्वपूर्ण और मुख्य भाग होता है  जो इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट से बना होता है | यह कंप्यूटर सिस्टम का कमांड केंद्र होता है  और कंप्यूटर से जुड़े प्रत्येक कंपोनेंट और उपकरण के साथ तालमेल बनाकर निर्देशों को प्रवाहित करता है |

  • Micro Processor : प्रोफेसर कंप्यूटर कहां सबसे महत्वपूर्ण भाग होता है  जो कंप्यूटर सिस्टम को चलाता है | इसे कंप्यूटर का दिमाग भी कहा जाता है |  यह कंप्यूटर सिस्टम के मुख्य केंद्रीय प्रोसेसिंग यूनिट (CPU) होती है जो कंप्यूटर के प्रत्येक कंप्यूटर से संबंधित डेटा को प्रोसेस करता है |  प्रोसेसर की गति को मेगाहर्ट्ज (Mhz) में नापा जाता है

  • Memory : कंप्यूटर सिस्टम कि वह इकाई जो सूचनाओं को स्थाई या अस्थाई रूप से संचित करने का कार्य करें उसे मेमोरी उपकरण कहते हैं | कंप्यूटर मेमोरी दो प्रकार (Primary & Secondary) के होते हैं |  प्राइमरी मेमोरी चिप के रूप में इंटीग्रेटेड सर्किट द्वारा बनी हुई होती है | प्राइमरी मेमोरी तीन प्रकार की होती है एक रैंडम एक्सेस मेमोरी, दूसरी रीड ओनली मेमोरी, और तीसरी फ़्लैश मेमोरी |

  • Cd-ROM / DVD-ROM Drive : सीडी रोम एक ड्राइव होता है जिसका प्रयोग कॉन्पैक्ट डिस्क के डाटा को पढ़ने के लिए किया जाता है|  कंप्यूटर सिस्टम में सॉफ्टवेयर लोड करने के लिए भी सीडी रोम ड्राइव का प्रयोग किया जाता है |

  • Hard Disk : हार्ड डिस्क एक स्टोरेज डिवाइस है|  इसका प्रयोग कंप्यूटर में डाटा को स्थाई रूप से स्टोर करने के लिए किया जाता है|

  • Monitor :  मनिंदर कौ  विजुअल डिस्प्ले यूनिट कहां जाता है   जिसे एक केबल द्वारा मुख्य मशीन से जोड़ा जाता है| मॉनिटर स्क्रीन पर सूचनाओं को प्रदर्शित करता है|  मॉनिटर भिन्न-भिन्न प्रकार की हो सकती हैं |

  • Keyboard & Mouse : कीबोर्ड और माउस दोनों इनपुट उपकरण हैं |  कीबोर्ड एक टेक्स्ट इनपुट डिवाइस है जिसके द्वारा टेक्स्ट एंटर किया जाता है |  माउस एक कर्सर कंट्रोल इनपुट डिवाइस है |


 

Points To Be Remember

  • सूचना प्रणाली के पांच भाग क्रमशः लोग, प्रकिर्याएँ, सॉफ्टवेयर,  हार्डवेयर और आंकड़े होते हैं

  • कार्य प्रणाली के आधार पर कंप्यूटर सिस्टम को डिजिटल कंप्यूटर, एनालॉग कंप्यूटर, और हाइब्रिड कंप्यूटर में विभाजित किया जाता है |

  • डिजिटल कंप्यूटर सभी कार्य केवल 0 तथा 1 संख्याओं में ही करते हैं |

  • सन 1971 में इंटेल कॉरपोरेशन द्वारा सर्वप्रथम माइक्रोप्रोसेसर चिप का विकास किया गया था |

  • ई.डी. रॉबर्ट द्वारा प्रथम माइक्रो कंप्यूटर का विकास किया गया |  

  • हैंडहेल्ड कंप्यूटर आकार में छोटा होता है जिसे हथेली पर भी रख सकते हैं |

  • मिनी कंप्यूटर को मिड रेंज कंप्यूटर के नाम से भी जाना चाहता है |

  • Param और BlueZene सुपर कंप्यूटर का उदाहरण है |

  • एनालॉग कंप्यूटर तापमान, दबाव, गति या विद्युत प्रवाह आदि विशेष संकेतों के आधार पर कार्य करते हैं |

  • ब्लेज पास्कल ने 1642 में विश्व का पहला यांत्रिक अंकीय गणना यंत्र विकसित किया था |

  • UNIVACI प्रथम डिजिटल कंप्यूटर था जिसका उपयोग व्यापारिक कार्यों के लिए होता था |

  • पर्सनल डिजिटल असिस्टेंस और स्मार्टफोन सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले हैंडहेल्ड कंप्यूटर है

  • सिस्टम बोर्ड को मदरबोर्ड भी कहते हैं यह कंप्यूटर का सबसे महत्वपूर्ण और मुख्य भाग होता है जो इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट से बना होता है|

  • प्रोसेसर की गति को मेगाहार्ट और गिगाहार्ट में मापा जाता है

  • SMPS प्राप्त होने वाली २०० वोल्ट की AC को DC में परिवर्तित करता है |

  • बस लाइंस बिट्स का एक मार्ग होता है जो डाटा निर्देशों को भेजता है

  • चार्ल्स बैबेज को कंप्यूटर का जनक भी कहा जाता है|